कार्मिक विभाग के आदेश में खामी से फंसा पेंच, अब कैबिनेट से सहमति लेने की तैयारी
Jharkhand Officer Salary: प्रशासनिक सेवा में नया संकट दिखा। 207 नए अधिकारियों को वेतन नहीं मिला है। अधिकारी पिछले सात महीने से खाली हाथ हैं। कार्मिक विभाग के एक आदेश में गलती हुई। इस प्रशासनिक चूक से भारी संकट खड़ा हो गया। अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए जिलों में भेजा था। वहां ट्रेजरी ने वेतन भुगतान से इनकार किया। अब मामले में कैबिनेट से मंजूरी की तैयारी है।
Jharkhand Officer Salary: 20 मार्च के आदेश से शुरू हुआ विवाद
13वीं सिविल सेवा परीक्षा से इनकी नियुक्ति हुई थी। कुल 207 अधिकारियों का प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ। पहले उन्हें प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान भेजा गया था। वहां प्रशिक्षण के दौरान नियमित वेतन मिलता रहा। संस्थान में ट्रेनिंग पूरी होने पर नए आदेश आए। कार्मिक विभाग ने 20 मार्च 2026 को आदेश निकाला। सभी अफसरों को जिलों में प्रशिक्षण पर भेजा। इसी पदस्थापन आदेश में तकनीकी गलती रह गई। इस चूक से जिलों में वेतन निकासी बंद हो गई।
Jharkhand Officer Salary: स्वीकृत पद से अधिक संख्या पर ट्रेजरी की रोक
जिलों में ट्रेनिंग कर रहे अफसरों का बिल बना। बिल तैयार कर जिला ट्रेजरी को भेजा गया। ट्रेजरी ने बिल पास करने से तुरंत मना किया। ट्रेजरी ने कड़े नियमों का हवाला दिया। जिले में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद सीमित हैं। बिल में दर्ज संख्या स्वीकृत पदों से अधिक थी। वेतन घोटाले के बाद वित्त विभाग ने नियम बनाए। स्वीकृत पद से अधिक पर वेतन निकासी नहीं होगी। नियमों के फेर में प्रशिक्षु अधिकारियों का वेतन फंस गया।
अब कैबिनेट से विशेष अनुमति लेने की कवायद तेज
ट्रेजरी की आपत्ति से कार्मिक विभाग बैकफुट पर है। अब गलती सुधारने के लिए कैबिनेट का सहारा लेंगे। कैबिनेट की विशेष सहमति का प्रस्ताव बन रहा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही वेतन निकासी होगी। अतिरिक्त पदस्थापन पर सरकार ही छूट दे सकती। प्रभावित अधिकारी सचिवालय और विभागों के चक्कर काट रहे। कई महीनों की दौड़ लगाने पर भी राहत नहीं। इस लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
बिना वेतन घरेलू खर्च और ईएमआई चुकाना हुआ मुश्किल
सात महीने से वेतन न मिलने से अधिकारी परेशान। नए अफसरों के सामने आर्थिक तंगी की नौबत आई। उन्हें मकान किराया और राशन जुटाने में दिक्कत। बच्चों की स्कूल फीस और ईएमआई का बोझ बढ़ा। कई अफसरों को कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ा। परिवार की बुनियादी जिम्मेदारियां निभाना कठिन साबित हुआ। फील्ड में ड्यूटी कर रहे अफसरों का मनोबल गिरा। मानसिक तनाव के बीच वे दिन-रात काम कर रहे।
राज्य के सभी 24 जिलों में तैनात हैं प्रभावित अफसर
वेतन संकट से राज्य का कोई जिला अछूता नहीं। दुमका जिले में सबसे अधिक 12 अफसर तैनात। खूंटी और देवघर जिले में 11-11 अधिकारी हैं। राजधानी रांची और गुमला में 10-10 अफसर परेशान। पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा, सिमडेगा और जामताड़ा में 9-9 अफसर हैं। गोड्डा, पाकुड़ और साहेबगंज में भी 9-9 अफसर हैं। धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, रामगढ़ और लातेहार में 8-8 अधिकारी हैं। गढ़वा, पलामू, चतरा और कोडरमा में 7-7 अफसर तैनात हैं। बोकारो, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला में भी 7-7 अफसर हैं। सभी अधिकारी जल्द वेतन मिलने की आस में हैं।
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