- इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
- ‘जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ विषयक सम्मेलन में ग्रामीण-शहरी विकास पर हुआ मंथन
GST Reforms Conference Institute for Education Saraikela : सरायकेला स्थित इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में ‘जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ (GST reforms and impact on rural and urban livelihoods and employment) विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शनिवार को समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

GST देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ : प्रो. राकेश सिन्हा
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद प्रो. (डॉ.) राकेश सिन्हा (Prof. (Dr.) Rakesh Sinha) ने अपने संबोधन में जीएसटी सुधारों (GST Reforms) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए 1968 तक के विभिन्न आर्थिक सुधारों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बन चुका है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तुओं को दो श्रेणियों- मेरिट गुड्स (Merit Goods) और डिमेरिट गुड्स (Demerit Goods) में बांटा जाता है। डिमेरिट गुड्स जैसे सिगरेट और तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, इसलिए उन पर अधिक टैक्स लगाया जाता है। वहीं, दवाइयों और खाद्य सामग्रियों जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है या उन पर कर में काफी कमी की गई है।

स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी दरों में कटौती
उन्होंने बताया कि सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी दरों में कटौती की है। जीएसटी रिफॉर्म 2.0 का उद्देश्य ‘स्वदेशी ग्रो एंड मल्टीनेशनल गो’ (Grow Swdeshi and Go Multinational) को साकार करना है।
कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज 43% लोग कृषि कार्य से जुड़े हैं और वर्तमान समय कृषि के विकास का युग है। झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को जल, जंगल और जमीन से अलग नहीं किया जा सकता। भूमि स्वामित्व के मुद्दे पर उन्होंने प्राकृतिक अधिकारों की भी चर्चा की।

छात्र- छात्राओं को संदेश
छात्र-छात्राओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा, रोजगार और आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ अपने गांव और समाज के विकास के लिए भी योगदान देना जरूरी है।
GST से ग्रामीण-शहरी अर्थव्यवस्था को मिला संतुलन : प्रो. संजय कुमार झा
रामचंद्र चंद्रवंशी यूनिवर्सिटी, पलामू के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने कहा कि भारत में जीएसटी कोई नई अवधारणा नहीं है, लेकिन इसके लागू होने से व्यापारिक ढांचे में व्यापक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

डॉ. विभा पांडेय ने बताईं सरकारी योजनाएं, शिक्षा है प्राथमिकता
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड की उप निदेशक डॉ. विभा पांडेय ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस स्तर का सम्मेलन होना सराहनीय पहल है। उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि NET और JET योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जारी है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
डिजिटल और फाइनेंशियल लिटरेसी में सुधार जरूरी : डॉ. रंजीत प्रसाद
कोल्हान विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य डॉ. रंजीत प्रसाद ने कहा कि भारत में डिजिटल और फाइनेंशियल लिटरेसी की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद छोटे से लेकर बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिला है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, जिससे डिजिटल साक्षरता के माध्यम से लघु एवं गृह उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिल सके।

दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ, जर्नल का विमोचन
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के साथ कॉलेज के निदेशक आरएन महांती, सम्मेलन की कन्वेनर एवं कोल्हान यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती, चेयरपर्सन किंसुक महांती और प्रिंसिपल डॉ. स्वीटी सिन्हा द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। कॉलेज के निदेशक आरएन महांती ने स्वागत भाषण में कहा कि दो दिनों तक चले विचार-मंथन की रिपोर्ट शिक्षा, शोध और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
सम्मेलन की कंवेनर एवं कोल्हन विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती ने सम्मेलन को शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से मील का पत्थर बताया।समारोह में एसोसिएट प्रोफेसर रश्मि शर्मा ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. मनीष झा और प्रो. जेबी कोमरै ने प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक साझा किया।इस दौरान 9 और 10 जनवरी 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के जर्नल ‘Emerging Frontiers in Artificial Intelligence and Sustainable Technologies’ का विमोचन भी किया गया। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएट प्रोफेसर श्वेता रंजन ने किया।
तकनीकी सत्रों में गहन शोध प्रस्तुति
चौथा सत्र : कीमतें, खपत और आजीविका – इस सत्र में झारखंड, बिहार सहित देशभर के पांच प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अध्यक्षता एक्सएलआरआई के प्रो. पिंगाली वेणुगोपाल ने की। रिसोर्स पर्सन बीएचयू के जेबी कोमरै और मुंगेर यूनिवर्सिटी की डॉ. नवलता रहीं। रिपोर्टिंयर शरबानी मुखर्जी थीं।
पांचवां सत्र : कारोबारी माहौल और स्थानीय विकास- इस सत्र में सात प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अध्यक्षता बीएचयू के जेबी कोमरै ने की। रिसोर्स पर्सन एक्सएलआरआई के प्रो. पिंगाली वेणुगोपाल और डॉ. मिथिलेश चौबे थे, जबकि रिपोर्टिंयर असिस्टेंट प्रोफेसर अर्चना थीं।
छठा सत्र : नीति सबक और भविष्य का मार्ग- अंतिम सत्र में नीति और भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई। अध्यक्षता एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. मनीष झा ने की। रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. सुहिता चटर्जी (द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन), स्टेट टैक्स (GST) के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर डॉ. राजेश कुमार, एनआईपीए अफ्रीका की प्रो. आरती श्रीवास्तव और इग्नू देवघर के क्षेत्रीय डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सरोज मिश्रा शामिल रहे। रिपोर्टिंयर निशा रानी ब्रह थीं।



