परिणाम रद्द करने की मांग वाली अपील में अलग याचिका खारिज
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट में 11वीं से 13वीं संयुक्त झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग से जुड़ी अपील पर सोमवार को सुनवाई हुई। यह अपील अयूब तिर्की एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। अपील में एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें परीक्षा परिणाम रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका खारिज कर दी गई थी। सोमवार की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं ने राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने से जुड़े मामले को भी इस अपील के साथ सुनने का आग्रह किया। हालांकि, अदालत ने इस संबंध में दाखिल अंतरिम आवेदन (आईए) को खारिज कर दिया।
Ranchi News: एकल पीठ में आदेश सुरक्षित होने का दिया गया हवाला
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी है और सरकार के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर एकल पीठ में सुनवाई हुई है। ऐसे में दोनों मामलों की सुनवाई साथ की जानी चाहिए।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि एकल पीठ संबंधित मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख चुकी है। इसके बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब एकल पीठ सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख चुकी है, तब उस मामले को साथ सुनने के अनुरोध से जुड़े आईए पर आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपीलकर्ताओं का अंतरिम आवेदन खारिज कर दिया। यह आदेश परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली मुख्य अपील के अंतिम निपटारे के समान नहीं है।
Ranchi News: एकल पीठ ने पहले क्यों खारिज की थी याचिका?
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका अक्टूबर 2025 में खारिज कर दी थी। यह याचिका अयूब तिर्की और राजेश कुमार की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि आपत्तियां समय पर नहीं उठाई गई थीं। साथ ही, मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ी नहीं मिली थी, जिसके आधार पर घोषित परिणाम रद्द किया जा सके।
एकल पीठ के इसी फैसले के खिलाफ अयूब तिर्की एवं अन्य ने लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) दायर की। अब इस अपील में एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई है। अपीलकर्ताओं की मांग है कि मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद्द करने से संबंधित उनके तर्कों पर विचार किया जाए।
डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षकों के अनुभव पर उठे थे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अपनी रिट याचिका में आरोप लगाया था कि जेपीएससी ने उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन कराया, जबकि उनके अनुसार परीक्षा नियमों में इसकी अनुमति नहीं थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि मूल्यांकन के लिए तीसरी एजेंसी का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और उससे जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखी गई।
याचिका में क्षेत्रीय भाषाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर भी आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि कॉपियों की जांच ऐसे परीक्षकों से कराई गई, जिनके पास नियमों के अनुसार जरूरी अनुभव नहीं था। उनके मुताबिक, परीक्षकों के पास कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए था। इन कथित अनियमितताओं के आधार पर उन्होंने परीक्षा परिणाम रद्द करने की मांग की थी।
हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप थे। एकल पीठ ने अपने फैसले में मूल्यांकन प्रक्रिया में परिणाम रद्द करने योग्य गड़बड़ी नहीं पाई थी।
जेपीएससी ने पहले दी थी प्रक्रिया का बचाव
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा था। आयोग की ओर से दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में सफल नहीं होने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यदि उन्हें परीक्षा पद्धति या नियमों पर आपत्ति थी, तो उन्हें समय रहते इसे दर्ज कराना चाहिए था।
आयोग ने यह भी कहा था कि परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों के लिए समान नियम लागू किए गए थे और किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ। एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी थी।
अब आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
सोमवार को आईए खारिज होने के बाद परिणाम को चुनौती देने वाली एलपीए पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने से संबंधित मामले की सुनवाई और उसका आदेश भी इस पूरे विवाद के संदर्भ में अहम है। दोनों मामलों की कानूनी स्थिति और उनके दायरे को अलग-अलग समझना जरूरी है।
फिलहाल, सोमवार के आदेश में खंडपीठ ने केवल अपीलकर्ताओं की ओर से दाखिल अंतरिम आवेदन पर फैसला सुनाया। मुख्य अपील के अंतिम परिणाम को लेकर इस आदेश से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मामले में आगे क्या निर्णय होता है, यह अदालत की आगामी सुनवाई और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगा।
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