नीरज सिंह ने स्वीकारी फर्जीवाड़े की बात, IAS विनय चौबे पर भी कसा शिकंजा
Jharkhand Liquor Scam: ईडी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नई उत्पाद नीति की जांच शुरू की। ईडी ने फर्जी बैंक गारंटी मामले में पूछताछ की। आरोपी नीरज सिंह का बयान दर्ज किया गया। नीरज सिंह ने फर्जी बैंक गारंटी की बात स्वीकार की। जांच एजेंसी ने इसीआईआर में एसीबी की एफआईआर जोड़ी। इसमें आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर भी आरोप हैं। अब घोटाले से जुड़े कई चेहरों पर शिकंजा कसेगा।
Jharkhand Liquor Scam: 10 करोड़ से अधिक की फर्जी गारंटी जमा
जांच में मैनपावर सप्लाई कंपनियों की करतूत खुली। मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी ने फर्जी गारंटी जमा कराई। कंपनी ने 5.35 करोड़ की फर्जी गारंटी दी थी। दूसरी कंपनी मेसर्स मार्शन इनोवेटिव ने धांधली की। मार्शन ने 5.02 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी दी। दोनों कंपनियों के दस्तावेजों पर नीरज सिंह के हस्ताक्षर मिले। पूछताछ में आरोपी ने सारे राज उगल दिए। उसने फर्जी दस्तावेज तैयार करने की बात मानी है।
Jharkhand Liquor Scam: चार जिलों की शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई
फर्जी बैंक गारंटी के दम पर वर्क ऑर्डर हासिल हुए। उत्पाद विभाग के अफसरों की इसमें खुली मिलीभगत रही। मार्शन इनोवेटिव को धनबाद जिले का काम मिला। विजन हॉस्पिटैलिटी को तीन जिलों का जिम्मा मिला। उसे हजारीबाग, कोडरमा और चतरा जिला सौंपा गया। दोनों कंपनियों ने शराब दुकानों में कर्मचारी तैनात किए। यह काम जेएसबीसीएल के अधीन कराया गया था। बिना सत्यापन के निजी कंपनियों को करोड़ों का काम मिला।
टेंडर नियमों की अनदेखी से सरकारी खजाने को नुकसान
नियमों के अनुसार वर्क ऑर्डर से पहले जांच जरूरी है। बैंक गारंटी का बैंक से सत्यापन कराना अनिवार्य होता। लेकिन आबकारी विभाग के अफसरों ने आंखें मूंद लीं। बिना किसी जांच-पड़ताल के कंपनियों को अनुमति दी। इससे सरकारी राजस्व को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा। टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए गए। मनपसंद कंपनियों को ठेका देने के लिए खेल हुआ। सिंडिकेट के इशारे पर पूरी नीति बदली गई थी।
छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़े हैं घोटाले के तार
उत्पाद नीति 2022 में बड़े स्तर पर बदलाव हुए थे। इसके बाद बाहरी कंपनियों की झारखंड में एंट्री हुई। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े गिरोह यहां सक्रिय हुए। उन्हीं कंपनियों को मैनपावर सप्लाई का ठेका मिला। अफसरों और शराब माफिया का मजबूत गठजोड़ बना। पूरे राज्य में अवैध कमाई का नेटवर्क तैयार हुआ। एसीबी ने पहले इस मामले में केस दर्ज किया था। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत पड़ताल कर रही।
कई वरिष्ठ अधिकारियों से जल्द होगी पूछताछ
नीरज सिंह के इकबालिया बयान से हड़कंप मच गया है। ईडी अब संबंधित बैंक शाखाओं से पत्राचार कर रही। बैंक गारंटी के जाली दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच होगी। तत्कालीन उत्पाद आयुक्त और सचिव के फैसलों की जांच होगी। विनय चौबे समेत अन्य अधिकारियों पर नजरें टिकी हैं। एजेंसी जल्द ही संबंधित अफसरों को समन भेजेगी। शराब घोटाले में शामिल सफेदपोशों की सूची बन रही। आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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