संथाली भाषा में पोस्ट कर दी श्रद्धांजलि, पैतृक गांव नेमरा में संपन्न होगा अंतिम संस्कार
PM Modi Condolence: रूपी सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां का बुधवार को निधन हुआ। उन्होंने एक्स पर संथाली भाषा में संदेश पोस्ट किया। प्रधानमंत्री ने रूपी सोरेन के सामाजिक योगदान को याद किया। उनका जीवन आदिवासी समाज के सशक्तीकरण को समर्पित था। प्रधानमंत्री ने सोरेन परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई। पूरा राज्य आज इस दुख से शोकमग्न है।
PM Modi Condolence: संथाली भाषा में संदेश लिख कर बंधाया ढांढस
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में आदिवासी परंपरा का सम्मान किया। उन्होंने संथाली भाषा में लिखकर अपनी आत्मीय भावनाएं रखीं। उन्होंने हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के प्रति संवेदनाएं जताईं। उन्होंने परिजनों के लिए शक्ति और संबल की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि रूपी सोरेन का निधन अत्यंत पीड़ादायक है। उनके कार्यों को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। समाज ने एक मजबूत और संवेदनशील अभिभावक खो दिया।
PM Modi Condolence: बरियातू के हिल व्यू अस्पताल में ली अंतिम सांस
रूपी सोरेन पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनका इलाज बरियातू स्थित हिल व्यू अस्पताल में जारी था। बुधवार रात करीब 8:40 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वे करीब 75 वर्ष की थीं। चिकित्सक डॉ. नितेश प्रिया ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी दी। वे दो साल से किडनी रोग से पीड़ित थीं। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। निधन की खबर से अस्पताल में समर्थक रो पड़े। वे शिबू सोरेन की धर्मपत्नी थीं।
मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं: भावुक हुए हेमंत सोरेन
मां के बिछोह पर हेमंत सोरेन ने मार्मिक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा कि मां ही उनकी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह शीतल छांव प्रकृति की गोद में समा गई। यह पल पूरे परिवार के लिए अत्यंत कठिन है। सूचना मिलते ही विभिन्न दलों के नेता अस्पताल पहुंचे। नेताओं ने मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। रात दस बजे पार्थिव शरीर को मोरहाबादी आवास लाया गया। वहां रातभर लोगों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ओरमांझी और गोला होते हुए पैतृक गांव नेमरा जाएगी अंतिम यात्रा
अंतिम संस्कार को लेकर पारिवारिक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने विस्तृत जानकारी दी। पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे तक मोरहाबादी आवास पर रहा। यहां अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। इसके बाद सड़क मार्ग से अंतिम यात्रा शुरू हुई। यात्रा ओरमांझी और गोला होते हुए नेमरा पहुंचेगी। नेमरा में ही पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार होगा। रास्ते भर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
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