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GST reforms India conference Saraikela : इस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, ग्रामीण-शहरी रोजगार पर हुआ मंथन

  • ICSSR के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

GST reforms India conference Saraikela : सरायकेला स्थित इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन (Institute For Education) में शुक्रवार को ‘जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन इंडियन काउन्सिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया है, जिसमें देशभर से शिक्षाविद, शोधार्थी और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का उद्घाटन व स्मारिका विमोचन

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर के सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता उपस्थित थे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, सरायकेला नगर पंचायत के अध्यक्ष मनोज चौधरी तथा विशेष वक्ता के रूप में सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड के प्रोफेसर डॉ. केबी सिंह शामिल हुए।कॉलेज के डायरेक्टर आरएन महांती, अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती और प्रिंसिपल डॉ. स्वीटी सिन्हा समेत सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया और स्मारिका का विमोचन किया।

जीएसटी से बदली आर्थिक संरचना, बढ़े रोजगार के अवसर

मुख्य अतिथि बीके गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि 1 जुलाई 2017 को लागू हुए जीएसटी कानून ने देश की कर प्रणाली को सरल बनाया और विभिन्न राज्यों के वैट से मुक्ति दिलाई। उन्होंने पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जीएसटी सुधार 2.0 के प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि दवा और पाठ्य सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं को कर से मुक्त किया गया है, जबकि ट्रैक्टर पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि जीएसटी दरों को 5 से 40 प्रतिशत के दायरे से घटाकर 5 से 28 प्रतिशत तक लाया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उपकरणों की उपलब्धता बढ़ी है और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। साथ ही, दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर छूट से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है, जिससे व्यापार और उद्योग को भी गति मिली है।

लॉजिस्टिक लागत में कमी, उद्योगों को मिला लाभ

बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए डॉ. केबी सिंह ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है, जिससे छोटे से बड़े उद्योगों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म 2.0 के बाद कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और व्यापारियों को अलग-अलग राज्यों के कर ढांचे से छुटकारा मिला है। उन्होंने भविष्य में ग्रामीण मांग में तेजी से वृद्धि होने की संभावना जताई।

ग्रामीण विकास में जीएसटी की भूमिका पर जोर

विशिष्ट अतिथि मानव केडिया ने कहा कि जीएसटी सुधारों में उन वस्तुओं को कर से बाहर रखा गया है, जिनका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक होता है। इससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने युवाओं और प्रतिभागियों से झारखंड के विकास में योगदान देने की अपील की और कहा कि इससे उद्योग, उपभोक्ता और राजस्व- तीनों में वृद्धि होगी।

वहीं, सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने जीएसटी फाइलिंग में आ रही समस्याओं का जिक्र करते हुए पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।

शैक्षणिक और शोध के लिए महत्वपूर्ण मंच

इससे पूर्व कार्यक्रम के आरंभ शुरुआत में डायरेक्टर आरएन महांती ने स्वागत भाषण किया। इस क्रम में उन्होंने इस सम्मेलन को प्रतिभागियों के लिए अति महत्वपूर्ण अवसर बताया।

कॉलेज की चेयरमैन एवं सम्मेलन की कन्वेनर डॉ. शुक्ला महांती ने कहा कि यह सम्मेलन शोध, अर्थव्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।अंत में प्रिंसिपल डॉ. स्वीटी सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

पहले दिन तीन तकनीकी सत्रों में हुआ गहन विमर्श

  • सम्मेलन के पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में ‘जीएसटी और ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन’ विषय पर 13 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
  • दूसरे सत्र में ‘जीएसटी और शहरी रोजगार गतिशीलता’ विषय पर पांच प्रतिभागियों ने विचार साझा किए।
  • तीसरे सत्र में ‘डिजिटल बुनियादी ढांचा और क्षमता निर्माण’ पर आठ शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

इन सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने अध्यक्षता, रिसोर्स पर्सन और रिपोर्टियर की भूमिका निभाते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।

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