झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक, विरासत और प्रकृति पूजन की परंपरा को मिला नया आयाम
Jamshedpur/Jharkhand : झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति श्रद्धा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अरका जैन यूनिवर्सिटी में भव्य ‘बाहा मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य झारखंड में सदियों से चली आ रही प्रकृति पूजा की परंपरा एवं जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देना तथा समाज में आपसी समन्वय, सौहार्द और सहयोग की भावना को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार गोड़ जोहार (पाद-प्रक्षालन) के साथ की गई। यह अनुष्ठान भारतीय संस्कृति में सम्मान, आदर और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस पारंपरिक स्वागत ने समारोह को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

समारोह में विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के अध्यक्ष प्रो एस एस रजी, कुलसचिव डॉ. अमित श्रीवास्तव एवं संयुक्त कुलसचिव डॉ. जसबीर सिंह धनजल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता निभाई और अपने विचार साझा किए। सभी ने मिलकर झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
अपने संबोधन में डॉ अमित श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि आपसी संबंधों को मजबूत करने और सकारात्मक वातावरण निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और सामूहिक विकास की भावना के साथ आगे बढ़ें।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं, जिससे वातावरण उल्लासमय और उत्साहपूर्ण बना रहा। समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ सौहार्दपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। यह आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में एकता, संस्कृति और सहयोग की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने में सफल रहा।



