रामगढ़ में 43 लाख की ठगी की जांच के दौरान ओमनगर में छापेमारी, 20 से अधिक मोबाइल और लैपटॉप बरामद
Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर इलाके में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। रामगढ़ में एक व्यक्ति से 43 लाख रुपये की ठगी के मामले की जांच करते हुए पुलिस जमशेदपुर पहुंची। इसके बाद रामगढ़ और जमशेदपुर साइबर थाना की संयुक्त टीम ने बिरसानगर जोन नंबर-2 बी स्थित ओमनगर, रोड नंबर-1 के एक मकान में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पांच युवक-युवतियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मकान से 20 से अधिक मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, लैपटॉप और नकदी भी बरामद की है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
Jamshedpur News: रामगढ़ में दर्ज मामले से मिला जमशेदपुर का सुराग
पूरे मामले की शुरुआत रामगढ़ में हुई 43 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत से हुई। पीड़ित ने ठगी की रकम को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान रामगढ़ साइबर थाना की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पैसों के लेन-देन की पड़ताल शुरू की। इसी दौरान जांच की कड़ियां जमशेदपुर के बिरसानगर इलाके तक पहुंचीं। इसके बाद रामगढ़ पुलिस ने जमशेदपुर पुलिस से संपर्क किया। दोनों जिलों की संयुक्त टीम ने मिली जानकारी का सत्यापन किया और ओमनगर स्थित मकान में छापेमारी की।
Jamshedpur News: ओमनगर के मकान से पांच युवक-युवतियां गिरफ्तार
पुलिस टीम ने बिरसानगर जोन नंबर-2 बी के ओमनगर, रोड नंबर-1 स्थित मकान में कार्रवाई की। वहां मौजूद पांच युवक-युवतियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस को संदेह है कि इसी मकान से साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और ठगी के पूरे तरीके का खुलासा पूछताछ तथा तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा।
20 से अधिक मोबाइल, सिम कार्ड और लैपटॉप बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले। इनमें 20 से अधिक मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और लैपटॉप शामिल हैं। इसके अलावा मौके से नकदी भी बरामद की गई है। पुलिस इन सभी सामानों को जांच के लिए अपने कब्जे में ले चुकी है। मोबाइल और लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डेटा की जांच की जाएगी। इससे आरोपियों के संपर्कों, बातचीत और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
टाटा स्टील के सेवानिवृत्त कर्मचारी का बताया जा रहा मकान
जिस मकान में छापेमारी हुई है, वह टाटा स्टील के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का बताया जा रहा है। पुलिस ने मकान मालिक को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। उससे यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि मकान में रहने वाले युवक-युवतियों से उसका क्या संबंध था। साथ ही, उसे वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। फिलहाल मकान मालिक की भूमिका को लेकर पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
देर रात तक होती थी युवक-युवतियों की आवाजाही
स्थानीय लोगों के अनुसार, मकान में देर रात तक युवक-युवतियों का आना-जाना लगा रहता था। कई बार लग्जरी गाड़ियों से भी लोग वहां पहुंचते थे। आसपास के लोगों को इन गतिविधियों पर संदेह जरूर होता था, लेकिन इसके पीछे कथित साइबर ठगी का नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी पुलिस की छापेमारी के बाद सामने आई। अब पुलिस स्थानीय लोगों से भी आवश्यक जानकारी जुटा सकती है। इससे मकान में चल रही गतिविधियों और वहां आने-जाने वाले लोगों के बारे में सुराग मिलने की उम्मीद है।
ठगी की रकम के लेन-देन की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र 43 लाख रुपये की ठगी की रकम है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि पीड़ित से ठगी गई राशि किन बैंक खातों में पहुंची और वहां से आगे कहां भेजी गई। बरामद सिम कार्ड और मोबाइल फोन के जरिए संदिग्ध संपर्कों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा हैं या नहीं। इसके अलावा दूसरे मामलों में उनकी संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के आधिकारिक खुलासे का इंतजार
इस कार्रवाई के बाद बिरसानगर में साइबर अपराध को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पांचों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस बरामद उपकरणों की जांच के बाद गिरोह के काम करने के तरीके और अन्य संभावित सदस्यों की जानकारी जुटाएगी। मामले में मकान मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस की ओर से शुक्रवार को पूरे प्रकरण का विस्तृत आधिकारिक खुलासा किए जाने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क का विस्तार कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।


